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एहसास-ए-इश्क़...

Dr. SandeepDr. Sandeep February 16, 2022
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दर्द-ए-दिल के लिए वो पैग़ाम-ए-हयात हो गई

जब से ग़म-ए-ज़िंदगी में वो मेरे साथ हो गई..

ग़लत सुना था एहसास-ए-इश्क़ आँखों से होता है

यहाँ उसकी मुस्कुराहट मेरे दिल के पार हो गई..

मैं तो उनके लफ्ज़ों पर ही ये दिल हार बैठा हूँ

मन ही मन में वो सब कुछ मेरे यार हो गई..

उनके ख़्यालों में मरीज़-ए-मोहब्बत हो गया हूँ

वो आब-ए-हयात बन दर्द-ए-इश्क़ का इलाज हो गई..

मेरे अल्फ़ाज़ों में उसकी ख़ुशबू ऐसे रच-बस गई है

लिखते-लिखते वो मेरी नज़्मों का जज़्बात हो गई..!!

#तुष्य

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