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बिख़रे अल्फ़ाज़...

Dr. SandeepDr. Sandeep February 10, 2022
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जब अपना कोई मिलता है तो लफ़्ज़ भी निरखते हैं

पर जब वो दिल तोड़ता है तो लफ़्ज़ भी बिखरते हैं..

कहते हैं हर लफ़्ज़ में छिपी होती हैं कुछ गहरी बातें

समझने वाले समझते बाक़ी मज़ाक समझ गुज़रते हैं..

ना जाने उनकी शान में क्या गुस्ताख़ी हो गई हमसे

आजकल दर्द-ए-अल्फ़ाज़ देखकर वो नहीं पिघलते हैं..

मैंने उठाया है ये कागज़ क़लम हम-क़लम तेरे लिए

पर मेरी नज़्मों को पढ़कर वो आह तक नहीं भरते हैं..

ख़ैर महसूस करो तो कोरे कागज़ पर भी दिख जाएँगे

ये लफ्ज़-ए-दिल हैं जो दर्द-ए-एहसास से ही उभरते हैं..!!

तुष्य

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