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आवाज़-ए-दिल (Part-2)...

Dr. SandeepDr. Sandeep May 11, 2022
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हवा गुम, मौसम नम, क़दम थम, ख़ामोश आवाज़ है

जानता हूँ अभी तक तबीयत तुम्हारी कुछ नासाज़ है

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बेशक ख़ुदसे दूर किया तुमने पर दिल नहीं नाराज़ है

हरदिन तेरेलिए करता है दुआ मेरा दिल-ए-फ़य्याज़ है

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जी रहा हूँ बिन तेरे ज़िंदगी मुझपर तबस्सुम-साज़ है

खल रही है तेरी कमी दिल देता तुझे रोज़ आवाज़ है

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एहतराम करता हूँ पर ज़वाब नहीं देना तेरा अंदाज़ है

पर मुझे सब है पता यारा तेरा दिल मेरा ग़म्माज़ है

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पत्थर सी न हो सख्त रक़्स-ए-ज़िंदगी न उम्रदराज़ है

तू है आज भी मेरी अज़ीज़ ये मेरी रूह की आवाज़ है

#तुष्य

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