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अरमान-ए-दिल...

Dr. SandeepDr. Sandeep April 8, 2022
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जिस्म खुश रूह उदास दिल बद-हवास लिए फिरते हैं

जो ना हो सके मुकम्मल ऐसे जज़्बात लिए फिरते हैं..

यूँ ही भटकते रहते अरमान-ए-दिल तुझसे मिलने को

आजकल लबों पर बनावटी मुस्कुराहट लिए फिरते हैं..!!

ज़िंदगी के सफ़र में हर मोड़ पर मिले हैं ज़ख़्म इतने

ऐसे गहरे ज़ख़्म-ए-हयात रूह पर साथ लिए फिरते हैं..

देखना सताएगी उनको भी वक़्त-ए-तन्हाई की मार बहुत

वो जो आज कल चेहरे पर बड़े शादाब लिए फिरते हैं..!!

लौट के कब आते हैं यूँ अकेला छोड़ कर जाने वाले

फ़िर भी उम्मीद-ए-यार में दिल-ए-बेताब लिए फिरते हैं..

अब तो जल्वा-ए-रुख़्सार-ए-यार को तरस गई मेरी आँखें

दीदार-ए-यार के लिए आँखों में ख़्वाब लिए फिरते हैं..!!

अगर तूझे नफ़रत हैं मुझसे तो भी कोई बात नहीं

हम तो दिल में दुआ आंखों में प्यार लिए फिरते हैं

ये तक़ाज़ा-ए-तहज़ीब ही है इस राहुल बनारसी का

हम तो मैदान-ए-जंग में भी आदाब लिए फिरते हैं..!!

#तुष्य

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