अकेला छोड़ गए वो…'s image
Poetry1 min read

अकेला छोड़ गए वो…

Dr. SandeepDr. Sandeep February 4, 2022
Share0 Bookmarks 356 Reads1 Likes

जो कभी जीना सिखाते थे वो आज मरता छोड़ गए

अपना पन जताने वाले अकेले यूँ बिख़रता छोड़ गए..

जंग-ए-ज़िंदगी में जब जरूरत थी मुझे हम-सफ़ीर तेरी

ज़िंदगी के सफर में मुझ को अकेले चलता छोड़ गए..

देख तेरे ख़्यालों में कैसे ख़ुद को बिख़रा दिया है मैंने

जब से तुम अपनी यादों में मुझको तड़पता छोड़ गए..

आजकल तो कश्तियाँ भी मायूस रहती हैं किनारे पर

सुना है दरियापार करानेवाले उनको उजड़ता छोड़ गए..

आलम-ए-तन्हाई में बसर हो रही है अब ज़िंदगी मेरी

ग़म-ए-हयात में जो तुम  मुझ को बिफरता छोड़ गए..

तसव्वुर में तेरे अब रातें मेरी कंपकपाते हुए कटती है

आलम-ए-सर्द-ओ-ग़म में जो तुम मुझे ठिठुरता छोड़ गए..!!

#तुष्य

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts