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अजीब दास्तां है ये…

Dr. SandeepDr. Sandeep December 30, 2021
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क्या अजीब दास्ताँ है मेरे अफ़्साने की

शम-ए-तमन्ना पर ख़ाक होते परवाने की

फूल से खिले इस चेहरे के मुरझाने की

ख़्वाहिशों में रंगी हसरतों के बिखराने की..!!


मैंने जब भी कोशिश की उसे भुलाने की

उसके तसव्वुर को दिल से मिटाने की

अपने अरमानों की आवाज़ दबाने की

उसकी यादों से अपना पीछा छुड़ाने की..!!


पर किस्मत की साजिश उससे मिलाने की

अल्फ़ाज़ों के जरिए उसके क़रीब लाने की

नज़्मों से दिल-ए-दास्तान समझाने की

मेरे ज़ख़्म-ए-दिल पर मरहम लगाने की..!!



पर एक छोटी सी आरज़ू है दीवाने की

ख़ुदा तक अपनी ख़्वाहिश पहुँचाने की

इब्तिदा-ए-इश्क़ में जवाब-ए-ख़त आने की

मलिका-ए-हुस्न का हिजाब हट जाने की

याद बनकर उनके दिल में बस जाने की..!!

#तुष्य

शम-ए-तमन्ना: दीए की इच्छा, इब्तिदा-ए-इश्क़: प्रेम की शुरुआत

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