आग़ोश-ए-हुस्न-ए-यार...'s image
Poetry1 min read

आग़ोश-ए-हुस्न-ए-यार...

Dr. SandeepDr. Sandeep January 24, 2022
Share0 Bookmarks 260 Reads2 Likes

ना जमीं की चाहत है ना आसमाँ की चाहत है

आग़ोश-ए-हुस्न-ए-यार हूँ बस उस की राहत है..

आजा क़रीब इतना की मेरी साँसों को महका दे

तेरे जिस्म की ख़ुशबू की चारों ओर बरसात है..

तेरे इश्क़ का सुरूर कुछ यूँ चढ़ रहा मेरे ऊपर

आज दीवार-ए-जिस्म गिए जाएँ ऐसे हालात हैं..

शब-ए-बहार में सियाह ज़ुल्फ़ों से खेलने दे मुझे

तेरे साथ ये सहर से पहले कि आख़िरी रात है..

इस इश्क़ ने बताया देख ज़िंदगी कितनी हँसी है

ये जो मेरी नई ज़िंदगी है वो तेरी ही सौग़ात है..!!

#तुष्य

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts