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अधूरी ख़्वाहिशें...

Dr. SandeepDr. Sandeep February 18, 2022
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ऐसा नहीं ज़िंदगी की सब ख़्वाहिशें अधूरी रहती है

हाथों की लक़ीरें टूटी हों तो नसीब से दूरी रहती है

दिल की बात बोलने में होंठों की मज़बूरी रहती हैं

दिल से दिल ना मिले तो मुलाक़ात अधूरी रहती है

गुज़रे लम्हों को याद कर दिल में कस्तूरी रहती है

इंतज़ार की घड़ियों में हर साँस ग़ैर-ज़रूरी रहती है

जुदाई की दूरी में मिलन की प्यास ज़रूरी रहती है

उनके हसरत-ए-दीदार न मिलने की महजूरी रहती है

कहना तो बहुत कुछ है पर बात अधूरी ही रहती है

पर मुझ अहल-ए-क़लम के अल्फ़ाज़ों में ज़ुहूरी रहती है..!!

#तुष्य

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