रणभेरी's image
Share1 Bookmarks 54 Reads1 Likes


ना रुका अंधेरों से डरकर

मैं चला मशालों सा तनकर

हाथों में अपने अनल लिए

मन में इच्छाएं अटल लिए

मैं रुका नही, मैं थका नही

मुश्किल में पीछे हटा नही...


मैं आता हूं,इतना कहकर

चल दिया भेदने को लश्कर

आघात शत्रु ने प्रबल किए

मैं लड़ा,वार सब विफल किए

सर कटा वही जो झुका नही

जो गिरा धरा पे, उठा नहीं...


रणभेरी की गर्जन सुनकर

भीरू नर जाते शीघ्र सिहर 

वीरों ने दंभी कुचल दिए

परिणाम युद्ध के बदल दिए

जो कर्तव्य पथ पर डटा नही

उस शीश ताज भी सजा नही..

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts