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जुबाँ से बोल उठे

Dr. Kirti PandeyDr. Kirti Pandey March 22, 2022
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सदियों से खामोश बहुत थे, 
       आज जुबाँ से बोल उठे।
प्रीत की रीत को समझे न, 
      प्रीत मे जीवन तोल उठे।। 
तुमको सुनना था साजन मेरे , 
       मुझमे ठहरे जज़्बातों को।
ये सोचकर हम बेमतलब ही,
     आज लबों को खोल उठे।।

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