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सपनों के फूल

Dr. Geeta SharmaDr. Geeta Sharma December 25, 2021
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*~सपनों के फूल*~ 



ननिहाल की पगडंडी से
गुजरते हुए
मैंने अक्सर देखा है मां को
दशकों के पन्नों को 
पीछे उलटते पलटते हुए 
यादों की गठरी खोल
बच्ची बन गमकते हुए
बीच आंगन में
गौरैया सा चहकते हुए
बात बेबात 
झरते फूलों सा हंसते हुए
उसकी आंखों में
उग आती है अलग चमक
जब भी देखा है मां को 
अपने बचे सपने बीनते हुए

पीहर से ससुराल के रास्ते में
जो कुछ भी हुआ हो
उसने तह करके रख दी
अपनी बेलौस मस्ती
उससे छिटग गये 
उसके सपने
फिर भी सहेजती रही
अपनी आंखों का पानी
और बोती रही चुपके चुपके
अपने बच्चों की आंखों में
बचे सपनों के हुए बीज
अब उग आए हैं मेरी आंखों में
उसके सपनों के सुंदर सुंदर फूल
जिन्हें देख हंसती है मेरी मां
फूलों की टहनी पर बैठी गौरैया सी



*********

डॉ गीता शर्मा 

"नीलाभ हुआ है प्रेम रंग"काव्य संग्रह

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