मां होती है ईश्वर की पर्याय's image
Poetry3 min read

मां होती है ईश्वर की पर्याय

Dr. Geeta SharmaDr. Geeta Sharma December 30, 2021
Share0 Bookmarks 147 Reads2 Likes
मां होती है ईश्वर की पर्याय 

डॉ गीता शर्मा 

भोर की उजास में
दिन के भरते काज में
सांझ के सिंदूरी वितान में
रात की रजत गात में
नींद में सुंदर सपनों में
कथाओं की सबसे प्यारी परी सी
हर कहीं दिख जाती है मां


होली के चटख रंगों में
दीवाली के श्री उजास में
त्यौहार के उत्सवी भाव में
पूजन की सजी थाली में
कितने निर्जला उपवास में
तुलसी विरवे के दीप सी
हर कहीं दिख जाती है मां

शरद के पुलक चांद में
हेमंत के सुलगते अलाव में
बसंत के पीत उल्लास में
शीत की गरम रजाई में
गर्मी की ठंडी सुराही में
पावस के मल्हार राग सी
हर कहीं दिख जाती है मां

खेतों की हंसती फसलों में
भरे खलिहानों की मस्ती में
सांझ परे घर आती गौधूलि में
दूध दही और माखन मिश्री में
फलों की रसीली मिठास में
केसर वाली मीठी खीर सी
हर कहीं मिल जाती है मां


गरमागरम रोटी में 
छौंक वाली दाल में
गुजिया और मिठाई में
पापड़ चटनी अचार में
तुलसी अदरक वाली चाय में
रसोई से आती सौंधी सुगंध सी
हर कहीं मिल जाती है मां


प्रार्थनाओं की आर्त पुकार में
मंदिरों की लंबी कतार में
धागे बांधती  मान मन्नत में
नजर उतारती राई नोन में
दर्द से आहत निकली कराह में
आरती के मधुरम मधुरम नाद सी
हर कहीं मिल जाती है मां


अपने दुःख विसारती
दुःख दर्द और पीड़ा हरती
आंसुओं को पल्लू में भरती
खुशियों की न्यौछावर करती
बच्चों के सुख की पहरेदार
बच्चों के कवच कुंडल सी
हर कहीं दिख जाती है मां


मीठी लोरी और गीतों में
झूलते पालना स्वप्निल नींद में
बाल गोपाल की तोतली बोली में
संस्कारों की अमृत घुट्टी में
संत साध्वी की प्रज्ञा वाणी में
बच्चों की पहली पहली गुरु
हर कहीं मिल जाती है मां

वेदों की ऋचाओं में
कबीर नानक की बानी में
तुलसी कम्बन की चौपाई में
रहीम रसखान के दोहों में
सूरदास मीरा के पद भजनों में
व्यास वाल्मीक के महाकाव्य सी
हर कहीं मिल जाती है मां


गुंथे फूलों की उर माल्य सी
हवा में घुली संदली महक सी
ठहरी झील में निहारते चांद सी
गुनगुनी धूप के आंगन में आराम सी
शुभाशीष के अपरिमित सागर में
वात्सल्य नदी के सुरम्य घाट सी
हर कहीं दिख जाती है मां

श्रीराम की बजती पैजनियां में
कान्हा की चंद्र खिलौना हट में
सती पार्वती की सत साधना में 
सावित्री की दृढ़ तप तपस्या में
अहिल्या की राम प्रतीक्षा में
शिवरी के झूठे बेरों की टोकरी सी
हर कहीं दिख जाती है मां


कहते सुनते हैं ग्रंथ शास्त्र
मां से संभव हर असंभावना
मां की महिमा गाते आख्यान
भक्ति शक्ति का अक्षय भंडार
वात्सल्य की निर्मल बहती नदी सी
ईश्वर की मूरत में दिख जाती है मां
मां होती है ईश्वर का पूर्ण पर्याय





 *डॉ गीता शर्मा बित्थरिया*

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts