कैफियत's image
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सरगोशियों में बात करना

गुमसुम 

चुपचाप

खामोशी में लिपटी फिज़ा 

में रहना अच्छा लगता


क्या कैफियत थी दिल की

तेरे जाने के बाद

तेज़ रोशनी के कुमकुमे के नीचे 

'सियाह-फ़ाम' 

कोई दर्द छुप के बैठा था


किसी गर्म झोंके के साथ 

किसी ओर से 

थकी सी मोसीकी का 

कोई टुकड़ा 

गाढ़ी खामोशी में घुल जाता है,

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