ऑंख नहीं भरती है!'s image
Poetry1 min read

ऑंख नहीं भरती है!

Dilip LalwaniDilip Lalwani February 18, 2022
Share0 Bookmarks 27 Reads0 Likes
कई बार तुमको देखा है,
     पर आँख नहीं भरती है
 रूपसुधा की हर बूंद पी है
     पर ये तृष्णा नहीं मरती है।

रूप रंग की अरुणाई से
आलोकित है मेरा कण कण
 उफ्फ़ ये 
 मिलन सांझ नही ढलती है।

अलि के चुम्बन से तो 
कलि का बढ़ता यौवन है
पर हाय! 
अधूरी प्यास कँहा बुझती है।

चौदस में चढ़ती रूप कलाएं 
तो अमावस में ढल जाती हैं
 पर अथाह !
प्रेम सलिला सदानीरा बहती है
#दिलीप

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts