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निश्छल प्रीत !

Dilip LalwaniDilip Lalwani February 21, 2022
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कैसे भूले हम भला,
तेरी निश्छल प्रीत ने----
    वर्षों को गांठा व
      दिनों को बाँधा है,
   क्षणों को जिया व
      पलों को थामा है
तेरी निश्छल प्रीत ने----
सपनों की सुई में,
  पिरोई बेशुमार आशा
दुखों को काटा व
      सुखों को गूंथा है
 जीवन बनाया मधुर गीत
     तेरी निश्छल प्रीत ने---


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