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कुछ बातें करो,दिल भावन की!

Dilip LalwaniDilip Lalwani February 7, 2022
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आज रात है, मृदुल बसन्त की,
हठ न करो ,प्रिये अब जावन की।
ख्वाबों भरी रात है उतरती,
बातें करो कुछ दिल भावन की।

कलिका के स्पर्श से जयों,
        बढ़े है अलि का गुंजन,
इक  तेरे ख़याल से ही,
          बढ़े पुलकन मेरे दिल की।
और बढ़ जाती उम्मीदें,
            तुमसे प्रीत पावन की।
अब हठ न करो,तुम जावन की ।
बातें करो कुछ ,दिल भावन की।

  दारीचों के बीच लुकाछिपी,
    खेले है चंद्र-कलाएं।
वो भी आज रात आतुर हैं,
    लेने को तेरी बलाएँ।
अब छोड़ भी दो हठ, 
    जावन की,
  बसन्त में कँही बरस न जायें,
    घटा सावन की।
कुछ तो बात करो ,दिल भावन की।

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