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दिल की बेक़रारी आज भी जवां !

Dilip LalwaniDilip Lalwani January 9, 2022
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 पल पल रंगीन,
हर क्षण खुशनुमा ।
आज की मदहोश शाम ,
ये महका महका समाँ ।
वो दिल की बातें,
वो मोहब्बत के तराने।
वो इंतज़ार की घड़ियां,
न हो सकेगी शब्दो मे बयाँ।
मखमली अहसास और रेशमी जज्बात ,
अल्फ़ाज़ों में कैसे करूँ बयाँ।
उस बेक़रारी का आलम न पूछो,
वो गुजरे इश्क़ की खुमारी थी।
तन्हा दिल को चैन भी तेरे साथ था,
संग तेरे ही बेक़रारी थी।
तेरे प्यार की खुश्बू में आजभी, भीगा मेरा रवां रवां है
वो दिल की बेक़रारी आज भी जवां है।
आज भी जवां है।

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