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कहीं आजादी का मनाया जा रहा था जश्न

तो कहीं आजादी की छीन जाने की मातम।


किसीको मिलकर भी आजादी

कीमत न आए समझ।


आजाद होके भी लगाए नारा

ये आजादी हमको नहीं प्यारा।


जब पास में हो कोई चीज

तो समझ न आए मोल।


एक बार जो छीन जाए

तो फिर क्या लगाए मोल!


- दिब्याश्री

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