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Romantic PoetryPoetry1 min read

कैसे मुस्करउ मैं तुम्हारे साथ

Dhvani ModiDhvani Modi February 10, 2022
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कैसे मुस्करउ मैं तुम्हारे साथ
ये खुशियां भी किसी कर्ज़ सी है
डर लगता है कही ज्यादा न हसलू
कभी तो लगती किसी मर्ज़ सी है
काबिल नहीं मैं की चुका सकू ये उधार
निभाते है हम ये रिश्ता
जैसे कोई फर्ज़ सा है 

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