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था जो नीरस उसे मन लुभावन किया 
मेरे पतझड़ से जीवन को सावन किया।  
तुम हो गंगा सी अविराम अविरल प्रिये 
मैं अपावन जिसे तुमने पावन किया, 

@Devendra babu

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