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किताब ही रह गया।

Devanand lal KarnaDevanand lal Karna January 9, 2022
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मैं फक्त किताब था

किताब ही रह गया,

कोशिशें काफी की

पर चाहकर भी ना

बदल सका खुद को।

तुम कहानी थे

जब भी जी चाहा,

अपने हिसाब से

बदल लिया खुद को।

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