ज्ञान किरण's image
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चलना अगर सिख ले तू , 

    तो नियति तुझे चलायेगी।

मरना अगर सिख ले तू, 

    तो जीवन तुझे हँसायेगी।


रोते वही है वास्तव में, 

    मृत्यु से भय जो खाते है।

गोते लगाते है आसव मे,

     पर फिर भी लय ना पाते है।।


तु राग-रंग का मानव बन,

    जीवन को समझ न पायेगा। 

भवरों सा चंचल तेरा मन ,

    सुमन अमीय न पायेगा।।


तम के हृदय को चीर,

    रवि भाषमान हो आया है।

कहता है तुमसे उठो वीर,

     एक नया सवेरा आया है।।


ले ज्ञान किरण मैं ,

     पास तुम्हारे आया हूँ।

संग अपने जीवन कि,

     छोटी परिभाषा लाया हूँ।।


काटों में, कलियों में,

     अंगारो में, मखमली गलियो में,

तु गीत प्रेम के गाता चल,

     अरियों को भी गले लगाता चल।।


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