मेरी कल्पना's image
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जहान भर की खुशियां तुझे दे दी
के दर - बदर अब फिर रहा  हु मैं
चाहा था तुझे - देखे थे सपने तेरे
मुद्दतें हो गईं सोया नहीं हुआ मैं
मुट्ठी भरी रेत सा था
अब बिखर रहा हु मैं

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