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यदि तू ऐसे ही वेरागी बनी रहेगी

तो बात आगे कैसे बढ़ेगी 

समुद्र के सामने आने पर भी 

तू कब तक यूं ही प्यासी रहेगी

बिना मौसम के फूल खिलने दे

बाकी सब अब तू जाने दे

मुझको अब तू अपना हो जाने दे

कभी तो अपनी 

आंखों को मुझपर सेख

कब तक तू रोटियां सेखती रहेगी..

यदि तू ऐसे ही बैरागी बनी रहेगी

तो बात आगे कैसे बढ़ेगी 

तू मुझको पोहा ही खिलाएगी

 या कभी मुझसे इश्क भी लड़ाएगी....

दीपक (बेख्याली)


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