ना प्रेम ना चाहत's image
Share0 Bookmarks 40 Reads1 Likes
मेरे तुम्हारे बीच में अब तो

 ना प्रेम है और ना चाहत 

फिर भी इन धड़कनों पर तुम

निस दिन क्यों देते हो आहट

मैं ना तुम बिन अब अधूरी हूं 

मैं खुद में ही अब पूरी हूं 

मौत के संग मैंने जोड़ा नाता

तुम तो तोड़ चुके हो मुझसे नाता

 विरह की रुत है आई 

मेरे आंगन में बजी

मातम की शहनाई

मुझे नहीं चाहिए

अब साया किसी का 

खत्म कर दिया मैंने

किस्सा चाहत का

 मेरे तुम्हारे बीच में अब तो

ना प्रेम है और ना चाहत....

दीपक (बेख्याली)

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts