मां का चांद's image
Share0 Bookmarks 51 Reads2 Likes
कैसे त्यौहार का उत्सव मनाऊं  
 बिना बाप के दीप जलाऊं
मेरे घर का प्रकाश था वह 
अमावस्या के अंधकार में 
मेरी मां का चांद था वह
जो चला गया मेरी हिम्मत
मेरा साहस था वह
मेरा बाप था वह 
कैसे त्यौहार का उत्सव मनाऊं  
बिना बाप के दीप जलाऊं
मां को मैं उसका साहस
उसका सहारा दिखता हूं 
मां से कैसे बोलूं 
मैं भी अंदर से बेसहारा हूं 
भगवान ना करे किसी
बच्चे के जीवन में 
यह दिन आए 
बिना बाप के वह दीप जलाए

दीपक (बेख्याली)

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts