बेरोजगार's image
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दिल तो उसने बेरोजगार से लगा लिया


 लेकिन हाथ बेरोजगार का थाम नहीं पाई


 कहती थी हर सुख दु:ख में साथ खड़ी रहूंगी


 पर वह तो कुछ कदम भी साथ ना चल पाई 


पापा नहीं मान रहे, 


यह बात वह मुझे समझाने चली आई


प्रेम यदि सहज मिल गया होता


 तो आग का दरिया क्यों कहलाता 


वह पगली इतनी-सी बात नहीं समझ पाई


 बेरोजगार की कोई  प्रेम कहानी नहीं होती


काश! ये बात मैंने पहले जानी होती .....


दीपक (बेख्याली)


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