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आंसुओ की किताब

Deepak SainiDeepak Saini October 18, 2021
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मैंने आंसुओ से एक किताब लिखी है
जिसमें गिने चुने से पन्ने है
आंसुओ की स्याही बनाके लिख दिया 
जो भी मेरे दिल में है
वक्त के समंदर में जिंदगी की नाव हिचकोले खा रही
एक लहर के साथ तैरती
तो एक लहर के साथ डूबे जा रही है
सपनो के साहिल हासिल न हुए
दिल में दबे रह गए
गुजरते वक्त के साथ राख हो गए
क्या उम्मीद करे किस्मतो से अब
जो गहराइयों में दफन है
मैंने आंसुओ से एक किताब लिखी है
जिसमें गिने चुने से पन्ने है
         दीपक

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