डियर अजनबी's image
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मुझे आज भी याद है जब मैं अपने अनजान सफ़र पर निकला था। तुम मुझे लगभग 15 साल पहले मसूरी के पहाड़ों की वादियों में मिली थी। बारिश का मौसम था, कुछ बूँदें मेरे चेहरे पर गिर रही थी। तुम भी भीग चुकी थी। तुम्हारे कुछ बाल चेहरों से चिपके हुए थे, जो तुम्हें और भी खूबसूरत बना रहे थे। तुम्हारी आँखों में अजीब सी बेचैनी थी जो तुम्हारे बोलने से पहले ही बात करना शुरू कर चुकी थी। तुम उस समय जो कह रही थी,  वे बातें किसी दार्शनिक से कम नहीं लग रही थी !

            मुझे याद है ; उस बारिश के मौसम में हम काॅफी कैफे गये थे जहाँ काॅफी का आनंद लेते हुए तुमने कहा  कि 'अगर जिंदगी को समझना है तो भटकना जरूरी है।' मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि मैं जिंदगी के सफर में 10 साल भटकता ही रहा। मुझे उस समय नहीं पता था कि  मैं क्या कर रहा हूँ  ?, कहाँ जा रहा हूँ ? इस समय मैं श्रीनगर में हूँ। यहीं पर मैंने एक छोटा सा व्यवसाय शुरू किया है, जिससे अच्छी खासी कमाई हो जाती हैं।

तुमने यह भी कहा था, इन पहाड़ों की गोद में एक छोटा- सा घर लेना चाहती हो ! जिससे तुम इस खूबसूरत नजारे का प्रतिदिन आनंद ले सको और प्रकृति के बीच रह सको।
आशा करता हूँ,  तुम्हारी इच्छा पूरी हो गई हो !

शायद हम फिर कभी जिंदगी के सफर में भटकते हुए कहीं पर मिलें....!

                                          -आपका अजनबी दोस्त

~दीपक चौधरी 

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