निर-रस साल's image
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चल रहा है
कुछ जल रहा है 
मुझे अपना ही वक़्त
कुछ खल रहा है 

ना आस कोई 
ना पास कोई
फिर भी मै 
निराश नही

रह रह-कर 
यह भी गुजर जाएगा
तू, मैं और यह वक़्त
क्या पता कब सहम जाएगा।। 

सुरेन्द्र पंचारिया

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