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कहां आती है...

Dr. Vijit DabasDr. Vijit Dabas April 5, 2022
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अगर किसी ज़िंदगी में हो मक़सद गहरा कोई
सेज मुलायम हो पर सुकून भरी रात कहां आती है 

अगर पूरा ना हो सपना तुम्हारा देखा कोई
लाख जतन पे भी चहरे पे रंगत कहां आती है

खाली हाथ ना मुड़ा हो जिस दर से फकीर कभी
उस घर में डबास आखिर किल्लत कहां आती है

जिसकी सोच में मैल हो, जज़्बात सारे खेल हों
उस दिल में डबास आखिर औरत कहां आती है

सामने महोब्बत, वो प्यार की मूरत, करती शरारत
इसके अलावा जमीं पर जन्नत कहां आती है 

अगर सो जाऊं तेरे साथ, एक बिस्तर पर किसी रात
बता देना अगर भूल जाऊ मेरी औकात कहां आती है

तुम्हारे शहर जैसा शहर कोई देखा नही हम ने
हर मोड़ पर कातिल हैं, यहां अदालत कहां आती है 

अगर खून लाल है, सब एक ही फरिश्ते का कमाल है
तो बताए कोई ,उसके घर में जात-पात कहां आती है 

बना रहे तुम्हारा साथ यारों, उस पगली का प्यार यारों
अगर मरना भी चाहे डबास तो मौत कहां आती है 

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