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तुम सा बेहतर कोई नहीं सकल जीवन संसार में

chitravanshi officialchitravanshi official January 21, 2022
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तुमसे बेहतर कोई नहीं सकल जीवन संसार में


जब बनाया होगा तुमको उस परवरदीगार ने

फुरसत से सजाया होगा तुमको बैठकर विस्तार में

क्या खूब बनाया है तुमको इस विस्तृत आकार में तुमसे बेहतर कोई नहीं सकल जीवन संसार में


जब तुमको देखा था मैंने पहली रोज बाहर से

घर के अंदर देख रहा था बालों को तुम्हे संवारते

दिल आ गया देख कर तुमको इस अंदाज में

तुमसे बेहतर कोई नहीं सकल जीवन संसार में


मां ने तो पूछा होगा क्यूं इतनी गुमसुम रहती हो

रोती हो छुप छुप कर पर हमसे क्यों कुछ न कहती हो

मेरे लिए रोना तुम्हारा उचित नहीं है प्यार में

तुमसे बेहतर कोई नहीं सकल जीवन संसार मे


मेरे दिए उस झुमके को तुमने पहनकर खनकाया था

माथे पर जो बिंदी तुमने छोटा सा ही लगाया था

खूबसूरती और कही नही जो तुम्हारे चेहरे के उस निखार में

तुमसे बेहतर कोई नहीं सकल जीवन संसार में


चेहरे की वो लाली जिसपर मन हमारा मोह गया

आंखो का वो काजल जिसपर जग को हमने छोड़ दिया

दिल को हमारे सुकून दिया पायल की तुम्हारी झनकार ने

तुमसे बेहतर कोई नहीं सकल जीवन संसार में


फुरसत से बनाया है तुमको दिया वृहद आकर है

क्या इन बाजारू संसाधन से चेहरे की ये चमकार है

अरे सुंदरता की मूरत तुम दिल में तुम्हारे प्यार है

फिर क्यों दर्द छलकता इन नयनों से क्या कमी हमारे प्यार में

जब तुमसे बेहतर कोई नहीं सकल जीवन संसार में


— चित्रवंशी


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