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इन घरों में बताओ अब कौन रहता है?

Chitra Ka PushpakChitra Ka Pushpak November 14, 2022
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इन घरों में बताओ अब 

कौन रहता है?

इन लता-गुल्मों में 

किसका दिल बहलता है?

था कभी गुलज़ार

अब खाली पड़ा है

एक बीता वक्त 

यादों में जड़ा है

कोई आता भी नहीं दिखता यहां पर 

वक्त किसका देर तक घर में ठहरता है?

यही घर था यहां पर

कुछ लोग रहते थे

पेड़ को रब, धूल को 

चंदन समझते थे

बाल बच्चों से भरा रहता था आँगन

अब यहाँ मौसम उदासी-भरा रहता है।


घर उजड़ता है

घरों की नींव हिलती है

सभ्यताएँ एक दिन 

चुपचाप ढहती हैं 

कोई पौराणिक यहां पर साँस लेता

कोई सन्नाटा यहां हर पल टहलता है।

हर कोई सपनों का

अपना घर बनाता है

और एक दिन उसे

खाली छोड़ जाता है

कुछ दिनों बस झूलती है नामपट्टी

किन्तु स्मृति का महज ताला लटकता है।

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