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चिराग तले अंधेरा है !

Chitra Ka PushpakChitra Ka Pushpak October 27, 2022
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हर गांव से लेकर दिल्ली तक

झुग्गी बस्ती का बसेरा है

कितनी रातें काट दी मैंने

कब होने वाला सवेरा है !


किलकारी के गुंजन से लेकर

करुण भाव के रुदन तक

तिल-तिल होकर टूट रहा

ये कैसा मनुज बसेरा है

चिराग तले अंधेरा है !


किसी को लाखों का वेतन

कोई अब भी, घृणित-कृपण

समता का कानून कहां है

जिसे जो मिल गया

वो कहता मेरा है

चिराग तले अंधेरा है !


दहशत का वह दौर चला है

छाया घनघोर अंधेरा है

लोकतंत्र के इस महानगर में

कुछ लोगो का पक्का डेरा है

चिराग तले अंधेरा है !


जिसकी लाठी उसकी भैंस

चलता है, यहां पर सदियों से

पर इक दिन तू भी खाक बनेगा

क्या तेरा है क्या मेरा है

चिराग तले अंधेरा है !

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