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एक याद बहुत याद आती है
मेरे कदमों के नीचे
तेरा अपनी हथेली रख देना
यह एक बात बहुत सताती है

मुझे कांटो से बचा रहे थे 
या ,हाथो मे अरमान उठा रहे थे
यह बात समझ नहीं आती है

क्यू झुकी थी तुम्हारी निगाहे उस वक्त
मुझे पलको पर बिठा रहे थे
या आंखों में  कुछ छिपा रहे थे
मुझे आज भी नजरो की भाषा नही आती है

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