पांव से लिपटा है एक सफर's image
Poetry1 min read

पांव से लिपटा है एक सफर

charu Mohancharu Mohan June 8, 2022
Share0 Bookmarks 39 Reads1 Likes
पांव से लिपटा है एक सफर
भटकना बन गया है मुकद्दर

जिधर भी जाऊं ,,,,
तुझ से ही आ मिलता हु
जाने किस फकीर की
दुआओं का है असर

कोन पढ़ता है मेरे हक में दुआ
डुबू भी तो , उछाल देता है समंदर

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts