मुस्कुराना 's image
Poetry1 min read

मुस्कुराना

charu Mohancharu Mohan June 18, 2022
Share0 Bookmarks 0 Reads1 Likes
सिर्फ मुस्कुराहट ही काफी है 
किसी पर मिट जाने के लिए

तुम क्यों जहमत करते हो 
हाथो से चांद उठाने के लिए

उस बच्ची की "हसीं" काफी है
सब मज़हब भूल जाने के लिए

छोड़ो किताबे अब
आज एक दूसरे को पड़ते हैं
हर बात नही होती है
हर किसी को समझाने के लिए

एक बार मुस्कुरा तो दो
हम कुछ और नहीं मांगते हैं
चुप चाप गुजर जाने के लिए 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts