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चाय का चस्का और तुम

charu Mohancharu Mohan May 22, 2022
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चाय का चस्का और तुम एक जैसे हो
जब तक दोनो होंटो से ना लगे
सुबह अधूरी सी लगती है

चाय में घुली चीनी तुम्हारा एहसास है
और चाय पत्ती का क्या कहना
तुम्हारे गुस्से का कड़कपन है
और इलाइची है नखरा तुम्हारा

इसलिए  पसंद नहीं मुझे
जब कोई और तुम्हारी बनाई चाय 
की तारीफ करता है
दिल मेरा हर घूंट में सौ बार जलता है

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