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Romantic PoetryPoetry1 min read

कभी ग़र याद करो मुझको....

Chanchal JainChanchal Jain October 8, 2021
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कभी ग़र याद करो मुझको
तो यूँ करना,
खिड़की से बाहर निकाल देना हाथ और छू लेना बारिश की गिरती बूँदे।
छत की किनारी से लटकाए थे जो मनीप्लांट हमने, उन्हें सहलाना और चूम लेना उंगलियों को अपनी।
कभी ग़र याद करो मुझको
तो यूँ करना,
उबलती हुई चाय को आँच धीमी कर बुझने देना मद्धम-मद्धम और गिरा लेना एक अश्क़ उस याद में जब हमने पहली बार बनाई थी चाय साथ में ग़ज़ल गुनगुनाते हुए।
शाम को झूले पर बैठ जब ठेल दोगे उसे अपने एक पैर से तब याद करना मुझे क्षितिज की ओर निहारते हुए, जहाँ मृगमरीचिका सा मिलन है धरती और गगन का।
कभी ग़र याद करो मुझको
तो यूँ करना,
आंखें बंद कर लेना अपनी और एक गहरी साँस में भर लेना ख़ुश्बू उन चाँदनी रातों की जो रातरानी के तले गुज़ारी थीं हमने, कुछ आँखों में देख कर कुछ अश्कों में डूब कर।

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