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Romantic PoetryPoetry1 min read

आदतें अजीब होती हैं...

Chanchal JainChanchal Jain October 8, 2021
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आदतें अजीब होती हैं,

मुझे सब बिखेरने की आदत है

और तुम्हें सहेजने की।

मैंने जब-जब बिखेरा है

कमरे का सामान,

शेल्फ़ में सजी किताबें,रसोई में जब रख दिये

चाय-चीनी, दाल-चावल के डिब्बे

इधर-उधर!

तुमने आकर पीछे से सब रख दिया

वैसा का वैसा जैसा था पहले,

यह तुम्हारी आदत थी।

आदतें अजीब होती हैं,

हज़ारों मील दूर बैठे हुए भी लेकिन,

तुम्हें याद रखना मेरी आदत थी।

देशों के बीच साझे चाँद में तुम्हारा चेहरा देखना और बातें करना,

मेरी आदत थी।

आसमान से जब बरसें बादल,

उसमें भीगना जैसे तुम्हारे स्नेह की बारिश!

यह भी मेरी आदत थी लेकिन,

आदतें अजीब होती हैं,

जैसे है मुझे तुम्हारी आदत,

आदतें बहुत अजीब होती हैं!

काश, कि होती तुम्हें भी एक ऐसी ही आदत,

काश! कि होती तुम्हें भी मेरी तरह ही मेरी ही आदत।



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