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न सुनता दिल की फ़ुर्सत से दुआ कोई

Sukeshini BudhawneSukeshini Budhawne April 7, 2022
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न सुनता दिल की फ़ुर्सत से दुआ कोई 
न बैठा मुंतज़िर मेरा ख़ुदा कोई

मैं ने ख़ल्वत में बरसों यूँ गुज़ारे हैं
न गुज़रे इस डगर से ख़ुश-नुमा कोई 

तुम्हें मैं याद करती हूँ रिवायत सी 
न पाई फिर भी इस ग़म की दवा कोई

वफ़ा कर के भी मैं बे-घर हुई घर से 
न सह पाऊँ तुम्हारी अब जफ़ा कोई 

सज़ा मिलती रही मुझको मुहब्बत में
न देना अब मुझे फिर से सज़ा कोई 


~ सुकेशिनी बुढावने

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