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बहुत ही रो लिए चुप-चाप हो जाना

Sukeshini BudhawneSukeshini Budhawne April 18, 2022
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बहुत ही रो लिए चुप-चाप हो जाना
मधुर सपनों में खोकर अब तो सो जाना

अगर डर लगता सन्नाटों से तो फिर तुम
किसी के यादों के मेले में खो जाना 

अगर मौसम न आया लौट कर तो फिर 
बरस के तुम पिया, बादल सा हो जाना

तेरे दामन पे ये जो दाग़ है गहरा
कमा कर पुन्य थोड़ा आज धो जाना

हृदय की पीर कोई कैसे जाने रे
कभी बच्चों सा तुम भी थोड़ा रो जाना

हाँ, इक दिन तो ये काया ख़ाक होनी है 
धरा पर प्रेम के दो बीज बो जाना 

~ सुकेशिनी बुढावने 

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