कविता-शून्य's image
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कभी कभी कुछ
नहीं होता 
कुछ भी नहीं
सिवाय एक शून्य के...
रोइये गाइये
चीखिये चिल्लाईये
और हाँ..
हँस भी सकते हैं
पागलों की तरह
तो हँसिये
इसके पहले
कि ये भंवर तुम्हें
निगल जाए...

बृजेश कुमार 'ब्रज'

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