तुम्हारे संग गुजारे चंद लम्हे's image
Poetry1 min read

तुम्हारे संग गुजारे चंद लम्हे

Ashish SinghAshish Singh July 1, 2022
Share1 Bookmarks 141 Reads2 Likes
 आज तुम्हारे संग गुजारे मेरे वो चंद लम्हे
  अनचाही सी मुझे चंद खुशियाँ दे गये। 
  बस तुम्हारे हाथ अपने हाथों में ना रख सका
  ये सारे गम मुझे अनसुनी सजा दे गए। 
  सच कहूँ तो हर वक़्त मैं तुम्हे ही सोचता हुँ
  ऐसा लगता है तुम मुझे अपने अश्क भी दे गए। 
  तुम्हारी चाहत मे मैं इतना मशगूल हो गया 
  कि मैं खुद को तराशना ही भूल गया था। 
  आज तुम्हारे संग गुजारे मेरे वो चंद लम्हे
  अनचाही सी मुझे चंद खुशियाँ दे गए। 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts