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हाल ए दिल ( लेखक अनुज ओझा)

brahmananujbrahmananuj October 23, 2022
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विरह वेदना की ताप लिखे....

या मन का संताप लिखे....

दिल में जो तुफां मचा रहा....

उन यादों का भूचाल लिखे!


अबकी दीवाली में हे प्रिय.....

बोलो, ये विरहनी कैसे!

 अपने बेहाल दिल का हाल लिखे.....

मन मुरझाए, चेहरे के नूर, मेरे मोहम्मद.....

यादों की वेदना में अब क्षीण - हीन लगे....

तुम ना आए तो क्या होगा मेरा....

कैसे हम अपना दिल ऐ बेकरार लिखे!


मन की हंसी दुनियां में.....

मुहब्बत के पारिजात खिलखिला उठे....

गाती चिड़िया के स्वर....

विरह में बेकार लगे....

तुम ना लौटोगे इस दीवाली ....

सोच कर ही हम घबरा गए....

उन कसमों,वादों का हम क्या करें....

जिन्हें ख़ाके भी तुम सब भुलाये रहे....

मुहब्बत की हंसी ये दुनियां......

विरहा की रातों में सब बिसराए रहे!


अनुमानतः कितने दिनों में होगी तुम्हारी वापसी ......

विरह वेदना में तपे....

या प्रेमदीप जलाएं....

बना के रंगोली विरहा वाली.....

उसपे नाम तुम्हारा सज़ा के.....

दिन - रात नहीं कटते बिन तेरे.....

मन का हाल सारा संक्षेप लिखे....

कितने वियोगिनियों के मनमीत लौट आए....

इस दिवाली में.....

राह तके जा रहे हम....

लेके आस दिल में अपने....

इश्क़ में तेरे रंग जाने का ......

अरमानों के दीप जलाकर.......

योगी तेरे इश्क़ के दरिया में ख़ुद को डुबा.....

मन को अपने आज़, तेरे इश्क़ में रंग जाने को....

इश्क़ में तेरे डूबकर मर जाने तक.....


विरह वेदना की ताप लिखे....

या मन का संताप लिखे....

तेरे इंतज़ार में हे प्रिय....

पागल मन का क्या हाल लिखें!!



लेखक अनुज ओझा ( प्रयागराज कवि)

सम्पर्क - 6394255234

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