मेरा प्रेम पानी है's image
Romantic PoetryPoetry1 min read

मेरा प्रेम पानी है

Bina KapurBina Kapur August 13, 2022
Share0 Bookmarks 20 Reads1 Likes

पानी

कभी उन्मुक्त बहता हुआ सा

कभी शांत ठहरा हुआ सा

मेरा प्रेम पानी है....

कभी आँखों से बहता हुआ

कभी होठों पर रुका हुआ

मेरा प्रेम पानी है....

कोई रंग नहीं कोई गंध नहीं

कोई स्वाद नहीं आकार नहीं

मेरा प्रेम पानी है.....

किसी पत्थर पर व्यर्थ है कभी

किसी शिला को काट दे कभी

मेरा प्रेम पानी है....

कोई पाने को तरस जाता है

कोई पाकर बरस जाता है

मेरा प्रेम पानी है.....

कहीं अंजुरी में समाए हुए

कहीं अनंत गहराई लिए हुए

मेरा प्रेम पानी है.....

#bina

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts