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आईना और वक्त

bimalbimal June 27, 2022
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गुमान हुआ एक आईने को, 
मुझसा ईमानदार है न कोई
जैसा वो है, वैसे मैं बतलाऊं,
हुबहु, ना जोड़ घटाव कोई,

वक्त मुस्काता बोला, 
ऐ आईने, मैं बदलूं, तो
बदल जाए फितरत उसकी
तू क्या जाने, जो बताएगा
देखकर सिर्फ सूरत उसकी

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