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दूसरी भाषाएँ बोल लिजिए, सिख लिजीएँ

पर जो भाषा दिल से निकले उसे न छोडिएँ

गुस्सा होने पर जो शब्द निकल जाते है..

किसी पे प्यार आने पर जो शब्द दिल मे रह जाते है..

पर बया न हो पाते है..

किसी कि मदद मिलने पर जो दुआए निकलती है

वो सब क्या है..कौनसी भाषा हे..खूद से पूछ लिजीए..

वही हमारी मातृभाषाँ है..

चाहे जिव्हा से बहुत भाषाएँ निकले..पर जो दिलसे निकले

वही हमारी मातृभाषाँ है..

और हमे इसपर गर्व है, था और रहेगा..


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