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दिल अपना इतना बड़ा बनाना
कि सुख-दुःख, कष्ट-पीड़ा सब,
शांत-अशांत और 
धीर-अधीर, 
सभी तरह के लोग,
सब उसमें समा सकें,
क्योंकि दुनिया में तो
बहुत जगह है,
पर अक्सर वहाँ
जगह कम पड़ जाती है,
पर दिल में जब जगह बनाओ,
तो उससे बड़ी और गहरी जगह कोई और नहीं।
उसमें सब समा जाता है।

         
                         -भारती

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