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उदास हूं मैं

Bharat SinghBharat Singh May 22, 2022
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उदास हूं मैं 

तुम्हारी बेरुखी से

बातें हुए भी तुमसे 

अरसा हो गया

तुम्हारे ख्यालों में ही मैं जीता हूं

तुम कभी मेरी होगी कि नहीं 

यह चिंता मेरे को खा गई 

सूख गया हूं मैं कांटे की तरह

तुम्हारे प्यार में

पूछते हैं सब मुझे 

तुम्हें क्या हो गया है

जानती तो सिर्फ तुम ही हो 

मुझे तुमसे प्यार हो गया

उदास हूं मैं 

तुम्हारी बेरुखी से


सांझ होते ही मैं 

तुम्हारी ख्यालों में खो जाता हूं

मुझे चैन नहीं है 

मैं बेचैन हूं तुम्हारे बिना

तुम्हें शायद कोई खबर ही नहीं मेरी

खबर है तुमको तो एहसास दिलाओ मुझे

मैं तो सब तुम्हारे लिए ही लिखता हूं  

तुम पढ़ती हो कि नहीं मुझे यकीन नहीं है

उदास हूं मैं

मैं तुम्हारी बेरुखी से


तुम्हारे मजबूरियों को समझता हूं  मैं

इसीलिए तो हाथ पर हाथ धरे बैठा हूं

तुम्हारे मान को

मैं अपना अभिमान समझता हूं 

मैं तुमको पाना नहीं जीना चाहता हूं

समय-समय पर तुम 

हाल मेरा पूछ लिया करो

इतना तो हक है मेरा तुम्हारे पर 

मैं तुमसे प्यार करता हूं

उदास हूं मैं 

तुम्हारी बेरुखी से

 ~भरत सिंह



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